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॥ ऊर्ध्वं तिष्ठन्ति सत्त्वस्थाः ॥

मकर सक्रांति

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सूर्य देव को वेदों में जगत की आत्मा और ईश्वर का नेत्र कहा गया है। ऐसा माना जाता है की ब्रह्मा के नेत्रों से सूर्य की उत्पत्ति हुई थी। सूर्य देव को जीवन शक्ति ऊर्जा एवं स्वास्थ्य के देवता के रूप में मान्यता दी जाती है सूर्य देव की अनुकंपा से ही धरती लोक पर जीवन संभव है। प्राचीन आचार्यों ने उदय होते सूर्य के महत्व का वर्णन करते हुए सूर्य की आराधना को अत्यंत कल्याणकारी बताया है सूर्य देव प्रत्यक्ष देवता माने जाते हैं जिनकी उपासना शीघ्र फल देने वाली कही गई है। भगवान श्री राम के पूर्वज भी सूर्यवंशी थे। भगवान श्री कृष्ण के पुत्र ने भी सूर्य देव की उपासना करके कुष्ठ रोग से अपने को मुक्त किया था।

पुराणों व वैदिक ग्रंथों में पंच देवों का वर्णन आता है। कहा जाता है कि जो इन 5 देवताओं का पूजन करता है। उनके सभी तरह के दोष और पाप खत्म हो जाते हैं। इन पांच देवताओं को नित्य देवता और मनोकामना पूरी करने वाला भी कहा जाता है। इन देवताओं में एक देव सूर्य देव कहे गए हैं।

सक्रांति

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य देव का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने को सक्रांति कहा जाता है। यह साल में 12 बार मनाया जाता है सक्रांति पर्व पर सूर्य उदय से पहले उठ कर सूर्य की आराधना तीरथ स्नान दान सूर्य देव को जल देने की परंपराएं भारतवर्ष में व्याप्त है। सूर्य जिस राशि में प्रवेश करते हैं उसी के नाम पर सक्रांति का नाम होता है।

सूर्य के 12 सक्रांतियों में मकर सक्रांति का विशेष महत्व होता है। संपूर्ण भारत वर्ष में इस त्यौहार को बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तथा उत्तर की ओर चलना प्रारंभ करते हैं। मकर सक्रांति के समय नदियों में स्नान की परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। आधुनिक विज्ञान के साथ यदि इस को जोड़ें तो मकर सक्रांति के समय नदियों में वाष्पन(evaporating) शुरू होती है। इससे समस्त प्रकार के रोग दूर हो सकते हैं इसलिए नदियों में स्नान का महत्व हमारे प्राचीन ग्रंथों में बताया गया है महाभारत में पितामह भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही शरीर का त्याग किया था कारण श्री कृष्ण ने गीता में कहा था कि उत्तरायण में शरीर त्याग करने से आत्माओं को ब्रह्म की प्राप्ति होती है।

सूर्य का सक्रांति काल

सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. 14 जनवरी को सूर्य का मकर राशि में गोचर रात 08 बजकर 57 मिनट पर होने वाला है। स्नान दान का‌ समय 16 घटी पहले से शुरू होकर 16 घटी बाद तक माना जाता है।( 2:30 घटी =1 घंटा)

दान

नदी स्नान

जरूरतमंदों को सामर्थ्य के अनुसार दान दे।

तिल,तेल, गुड़, घी, खिचड़ी, रेवड़ी ऊनी वस्त्रों का दान, भोजन का दान, पक्षियों को दाना, गाय को चारा आदि का दान करें।

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