इस वर्ष का प्रारंभ में 'कालयुक्त' नामक संवत्सर रहेगा। इस वर्ष राजा 'सूर्य' तथा मन्त्री भी सुर्य ही रहेगा। राज सत्ता के अधिकारियों में परस्पर संबंध अनुकूल रहेगा।
राहु बुध की युति के सहयोग से पूर्वोत्तर भागों में प्राकृतिक विपत्तियां। रुस ,जापान, चीन,फिलीपींस,,पूर्वी भारत एवं ऑस्टेलिया आदि राष्टो में तुफान, भूकम्प, पर्वत के विघटन (टूटना) से जनन की हानि होगी।
भारत का पश्चिम देशों से व्यापार बढ़ेगा। विश्व व्यापार में भिक्षुक बदलाव होगा। भारत की ख्याति विश्व में (आयात -निर्यात) में बढ़ेगी। मँहगाई की समस्याओ में बढ़ोतरी होगी। कुछ राष्ट्रों की आंतरिक स्थिति चिंताजनक रहेगी ।जनधन की भारी ह्नानि ह सकती है। भारत को अपने पड़ोसी देशों से सावधान रहना पडेगा। भारतीय सीमाओ पर अतिक्रमण की घटनाएं घटित हो सकती है।
चैत्र शुक्ल पक्ष की कुण्डली का विचार करें तो लग्नेश अष्टमभाव में राहु के साथ है इसीलिए कृषक वर्ग और श्रामिक वर्ग के आन्दोलन की सम्भावना बनी रहेगी।
खून -खराबा , नर संहार बढ़ेगा। उग्रवाद व आंतकवादी ताकतें विश्व में बढेगी। वाहन तथा हवाई यातायात की दुर्घटना बढ़ेगी। पश्चिम देशों तथा भारत के पड़ोसी देशों में युद्ध के बादल मडरायेंगें। विश्व में महिलाओं पर अत्याचार की घटनाओं बढेंगी।
आर्द्रा प्रवेश के अनुसार इसका लग्न तुला है सूर्य के पीछे शुक्र है ग्रह स्थित के अनुसार भारत के पश्चिम एंव पूर्वी भागों के अधिकांश क्षेत्रों में गर्मी का प्रकोप बढ़ेगा। भीषण गर्मी तथा गर्म हवायें चलेंगी। जलीय ग्रह शुक्र मेषराशि में होने मानसून प्रभावित रहेगा। बर्षाकाल में दिल्ली सहित उसके पड़ोसी राज्यों में व्यापक वर्षा के संकेत है। कहीं बाढ़ ,भूस्खलन आदि के कारण कृषि जनधन की हानि होने के योग है।
शारदीय फसल की उत्पति कम होगी। प्रकृतिक जनित दोषों के कारण कृषि में कुछ हानि होगी। ग्रीष्मकालिन अनाज की उत्पति पर्याप्त होगी।